Bill Of Entry | 5 Step Quick Tracking

Bill Of Entry जब भी कोई आयातक या इम्पोर्टर दुनिया के किसी देश से कोई सामान मंगवता या इम्पोर्ट करता है। तो उसे इस शिपमेंट की पूरी जानकारी भारत सरकार के कस्टम डिपार्टमेंट को देनी होती है। जिसमे सामान का विवरण , उसकी कीमत कहाँ से आ रहा है , कितना आ रहा है ऐसी और अन्य जानकारी सरकार के सीमा शुल्क विभाग को देनी पड़ती है। जिससे कस्टम विभाग उस पर लगने वाला सीमा शुल्क या कस्टम ड्यूटी निर्धारित कर सके। इस पूरी जानकारी को इम्पोर्टर या कस्टम हाउस एजेंट सरकार को जिस प्रारूप में देता है उसे ही सरल भाषा में Bill Of Entry कहते हैं।

Bill Of Entry

 

दोस्तों नमस्कार आज हम लोग Bill Of Entry बारे में चर्चा करेंगे। Bill Of Entry ही इम्पोर्ट के सबसे जरूरी प्रारूप या प्रक्रिया होती है। आज हम इसके बारे में बहुत विस्तार से चर्चा करेंगे और आप को इसके बारे एक-एक चीज बारीकी से बताएँगे।

Full Form Of  BOE 

बोए का फुल फॉर्म होता है Bill Of EntryBill Of Entry इम्पोर्ट शिपमेंट के लिए एक लीगल डॉक्यूमेंट है जिसे इम्पोर्ट शिपमेंट आने से पहले इम्पोर्टर या इम्पोर्टर के कस्टम हाउस एजेंट के द्वारा सीमा शुल्क विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। Bill Of Entry कस्टम विभाग के ICEGATE में सबमिट किया जाता है।

जिसके आधार पर ही EDI सीमा शुल्क विभाग आयातित माल पर सीमा शुल्क निर्धारित करता है। जिसे भरने के पश्चात ही इम्पोर्टर अपने माल की प्राप्ति कर पाता है।

दरअसल जब भी कोई एक्सपोर्टर किसी भी देश से माल इंडिया को भेजता है और कार्गो को ऑन बोर्ड करवा कर शिपमेंट की अग्रिम जानकारी स्वरुप Pre Intimation Document इम्पोर्टर को शिपपमेंट सम्बंधित सारे दस्तावेज भेज देता है। जिसमे Bill Of Lading , Commercial Invoice , Packaging List और अन्य डॉक्यूमेंट।

जिसे इम्पोर्टर प्राप्त कर के अपने कस्टम हाउस एजेंट को देता है। CHA इसके आधार पर ICEGATE में इस डॉक्यूमेंट को चेकलिस्ट के रूप में सबमिट करता है। इस चेक लिस्ट को इम्पोर्टर को रिव्यु करने के लिए देता है।


जब इम्पोर्टर चेक कर के फाइनल कर देता है। फिर कस्टम हाउस एजेंट इसे फाइनल सब्मिसन के रूप में ICEGATE में सबमिट करता है। सीमा शुल्क विभाग चेक कर के अप्प्रूव करता है। इसे ही Bill Of Entry कहते हैं।

Bill Of Entry में निम्नलिखित जानकारियां दी जाती हैं।

आईजीएसटी (IGST)
पोर्ट कोड (Port code)
सीमा शुल्क (Customs duty)
अतिरिक्त शुल्क (Additional duty)
भुगतान का प्रकार (Mode of payment)
माल का मूल्य (Value of the goods)
दिनांक और बीओई संख्या (Date and BOE number)
आयातक का पता और नाम (Address and name of the Importer)

Bill Of Entry Status

जैसा की हम सब जानते हैं की आयात-निर्यात की सभी कार्य प्रणाली एक ही पोर्टल ICEGATE से ही नियंत्रित की जाती है। इसके साथ साथ सभी आयात निर्यात व्यापारियों द्वारा की जाने वाली सारी ऑनलाइन फाइलिंग सर्विस को ICEGATE ही नियंत्रित करता है। ICEGATE के पोर्टल माध्यम से ICES के लिए सीमा शुल्क के विवरण को ट्रैक करना आसान है ।

बिल ऑफ़ एंट्री स्टेटस चेक करने चेक करने के लिए निम्नलिखित स्टेप को फॉलो कर के बिल ऑफ़ एंट्री स्टेटस चेक कर सकते हैं सकते हैं।

अगर आप गूगल सर्च से जा रहें तो गूगल पे टाइप करें बिल ऑफ़ एंट्री स्टेटस या फिर दी हुई लिंक पर क्लिक करें। चेक Bill Of Entry Status.

अब आप Bill of Entry Status  at ICEGATE सेलेक्ट करें।

फिर अगले कॉलम में आप को पोर्ट सेलेक्ट करना है किस पोर्ट पर कार्गो आ रहा है।

बिल ऑफ़ एंट्री की डेट सेलेक्ट करें।

Captcha inter  कर के submit पर क्लिक करें

परिणाम आप के सामने है।

Bill Of Entry Tracking 

Bill Of Entry Tracking यदि आप के शिपर या एक्सपोर्टर ने आप को Pre Intimation Document भेज दिया है। आप ने Pre Intimation Document को अपने कस्टम हाउस एजेंट को हैंडओवर कर दिया है। जिसकी चेक लिस्ट बना कर , आप का अप्रूवल लेकर आप के कस्टम हाउस एजेंट ने सीमा शुल्क विभाग में शिपिंग बिल फाइल कर दिया है। तो के Bill Of Entry Tracking लिए यहाँ क्लिक करें। For Bill Of Entry Tracking Click Here

PO Full Form

PO का फुल फ्रॉम Parches Order   होता है। दुनिया में होने वाले सभी व्यापार जिसमे वस्तुओं की विक्री या खरीदारी होती है बिना PO के संभव ही नहीं है। PO एक आधिकारिक या कानूनी दस्तावेज है जो खरीदार द्वारा विक्री करता को दिया जाता है।

जिसमे वस्तु खरीदारी की सारी टर्म्स कंडीशन जैसे पेमेंट टर्म्स, गुड्स क्वालिटी , क्वांटिटी ,सप्लाई टाइम्स अन्य सभी डिटेल दिए रहते हैं। इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिज़नेस में PO दो प्रकार के होते हैं।

Import PO : इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट बिज़नेस में जब BUYER और सप्लायर में किसी भी प्रोडक्ट को लेकर मौखिक एग्रीमेंट हो जाता है तो बायर सप्लायर को एक लीगल पर्चेस आर्डर देता है। जिसे इम्पोर्ट PO कहते हैं।

Export PO : इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट बिज़नेस में PO एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है जो बायर के द्वारा सप्लायर को जारी किया जाता है। यही PO सप्लायर के लिए इम्पोर्ट PO होता है। और यही PO एक्सपोर्टर के लिए एक्सपोर्ट PO होता है।

BRC Full Form

BRC Full Form का फुल फ्रॉम Bank Realization Certificate होता है। BRC  का उपयोग इम्पोर्ट- एक्सपोर्ट बिज़नेस में Reserve Bank Of India और आप के बैंक द्वारा पेमेंट कन्फर्मेशन के लिए किया जाता है।

BRC | क्या है ?

जैसा की ऊपर बताया गया है की BRC का फुल फॉर्म Bank Realization Certificate होता है। मतलब आप का बैंक ये कन्फर्म करता है की। पेमेंट ट्रांसक्शन पूर्ण हो चुका है।

उदाहरण के लिए मान लीजिये की आप ने एक शिपपमेंट किसी देश से इम्पोर्ट किया। आप के एक्सपोर्टर ने आप को Pre Intimation Document भेज दिया। जिसके आधार पर आप के कस्टम हाउस एजेंट ने कस्टम विभाग या सीम शुल्क विभाग में Bill Of Entry Submit  कर दिया।

Bill Of Entry कस्टम से अप्रूव होते ही कस्टम विभाग आप को सूचित करता है की आप का टोटल पेमेंट कितना हुआ,इस पेमेंट के आधार पर आप को सीमा शुल्क कितना भरना है।

जब आप एक्सपोर्टर का पेमेंट और सीमा शुल्क दोनों का भुगतान कर देते हैं। तो आप का बैंक आप को एक पेमेंट सर्टिफिकेट जारी करता है। जिसे ही Bank Realization Certificate या BRC कहते है।

IDPMS Full Form |  फुल फ्रॉम

IDPMS का फुल फ्रॉम Import Data Processing and Monitoring System (IDPMS) होता है। जिसका काम हमारे देश में आने वाले सभी इम्पोर्ट शिपपमेंट का डाटा सुरक्षित रखने और उसे पूर्ण करने में मदत करता है।

IDPMS 

IDPMS :अपने देश में आने वाले सभी Import Shipment का लेखा-जोखा भारत सरकार की मुख्य बैंक RBI , उसकी सहायक बैंक जिसमे आप का खता होगा , और कस्टम विभाग के द्वारा करती है।

इन सभी को एक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रूप से काम कर पाने के लिए भारत सरकार ने एक पोर्टल बनाया है जो ICEGATE के अंडर में काम करता है , जिसे Import Data Processing and Monitoring System (IDPMS). कहते हैं।

आइये इसे विस्तार से समझते हैं..

जब भी हमरे देश में कोई भी शिपपमेंट इम्पोर्ट होता है, तो इसमें मुख्य रूप से 6 लोग सक्रिय रूप से शामिल होते हैं। जिसमे इम्पोर्टर, एक्सपोर्टर,कंटेनर कर्रिएर , रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया , आप की बैंक जिसमे आप का खता होगा , EDI या फिर सीमा शुल्क विभाग़ इसमें सबके अपने अपने काम है। अब आते हैं की इसमें IDMPS की जरूरत कहाँ पड़ती है ?


जब आप के इम्पोर्ट शिपपमेंट आने पर आप का Custom House Agent, ICEGATE में Bill Of Entry दाखिल करता है तो उसके आधार पर EDI या फिर सीमा शुल्क विभाग आप के IEC Code के नाम पर एक इंटिमेशन आप को देता हैं क़ि इस इस शिपमेंट के लिए आप को इतना पेमेंट और उसके ऊपर इतना सीमा शुल्क भरना हैं।

और आप के नाम और IEC के नाम पर जॉब विंडो ओपन होती हैं। जैसे ही आप दोनों पेमेंट पूरा जमा कर देते हैं , तो बैंक आप को पेमेंट कम्पलीट हो जाने पर एक सर्टिफिकेट जारी करता है जिसे BRC कहते हैं। जब आप इस सर्टिफिकेट को Import Data Processing and Monitoring System (IDPMS). में सबमिट करते हैं , तो जो आप के नाम से पेमेंट पेंडिंग दिखा रहा था। वो विंडो या जॉब क्लोज हो जाएगी।

चूँकि रोज लाखों क़ि संख्या में ऐसे शिपपमेंट इम्पोर्ट होते हैं जिनका डाटा सुरक्षित रखने और इसे सुचारु रूप से चलते रहने के लिए सरकार ने एक मॉनिटरिंग Systems  बनाया है जिसे ही Import Data Processing and Monitoring System (IDPMS). कहते हैं।

Disclaimer : निष्कर्ष

आज हम लोगों ने इस एक ब्लॉग में Bill Of Entry जो की इम्पोर्ट का बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसपर चर्चा किये। Bill Of Entry से ही जुड़े अन्य टॉपिक जैसे BRC, IDPMS , PO Kya होता है। सभी पर विस्तार से चर्चा किये उम्मीद है की आप को सारी जानकारी अच्छी लगी होगी। दोस्तों जैसा की हमने आप को पहले भी बताया है की हम इस इंडस्ट्री में 10 साल काम कर चुके हैं एक्सपोर्ट मैनेजर पद पर रहते हुए इस्तीफ़ा दिए।

अब कोशिस यही की हर गांव से एक्सपोर्ट शुरू किया जाये इस अभियान में हमसे जो भी बन पड़ रहा है, कर रहे हैं सारी जानकारी बिलकुल सरल भाषा में दे रहें है। इसके अलावा हमारा कोई भी भाई अगर एक्सपोर्ट शुरू करना चाहता है तो हमें अपना मोबाइल नंबर और पूरा डिटेल मेल करे हमारी e-mail id vinodmishra169@gmail.com है, हम एक्सपोर्ट करने में आप की पूरी मदत करेंगे बहुत बहुत धन्यवाद्।

Frequently Asked Question 

Question 1. बिल ऑफ एंट्री और बिल ऑफ लैडिंग में क्या अंतर है?

Answer 1.  बिल ऑफ़ एंट्री को प्रवेश बिल भी कहते हैं। जो इम्पोर्ट शिपमेंट कहीं किसी भी देश से हमारे देश में इम्पोर्ट होता है तो इम्पोर्टर या कस्टम हाउस एजेंट द्वारा बिल ऑफ़ एंट्री कस्टम विभाग में सबमिट किया जाता है। जिसके आधार पर सीमा शुल्क का निर्धारण होता है।

कस्टम विभाग बिल ऑफ़ एंट्री की हिसाब से सीमा शुल्क भरवाकर कार्गो रिलीज़ करता है। जबकि बिल ऑफ़ लैडिंग को लदान बिल भी कहते हैं। जिसे शिपिंग लाइन एक्सपोर्टर के माल का कंटेनर जहाज पर लद जाने या लोड हो जाने पर ,एक्सपोर्टर को जारी करता है। बिल ऑफ़ लैडिंग एक प्रकार से बिल्टी को को कहते हैं।

Question 2. बिल ऑफ लैडिंग को सरल शब्दों में क्या कहते हैं?

Answer 2. बिल ऑफ़ लैडिंग को सरल भाषा में लदान बिल भी कहा जाता है। जैसे ट्रेनों में जब कोई मॉल लोड हो के कहीं जाता है रेलवे मॉल प्राप्ति की एक रसीद देता है , जिसे बिल्टी केहेत हैं हैं।

उसी तरह जब वैश्विक परिवहन में जहाजों द्वारा कोई माल कंटेनर में लोड हो के एक देश से दुसरे देश को ले जाया जाता है। तब जहाज माल रिसीविंग का एक पेपर देता है जिसे लदान बिल या बिल ऑफ़ लैडिंग कहते हैं।

Question 3. ई बीआरसी का क्या मतलब है?

Answer 3. ई – बीआरसी का मतलब ( इलेक्ट्रॉनिक -बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट ) होता है। जो आयातक द्वारा निर्यातक के पेमेंट पूर्ण हो जाने पर बैंक द्वारा आयातक को जारी किया जाता है।

Question 4 .आईडीपीएमएस का उद्देश्य क्या है?

Answer 4. भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अन्य देशों से आयात होने वाले माल के भुगतान , कुशल रखरखाव एवं उचित निगरानी के लिए एक इ पोर्टल बनाया है जिसे ही Import Data Processing and Monitoring System (IDPMS) कहते हैं।

Question 5. शिपिंग बिल और बिल ऑफ एंट्री में क्या अंतर है?

Answer 5. जब भी अंतर्राष्ट्रीय आयात निर्यात व्यापार में कोई भी शिपमेंट आयात या निर्यात होता है तो उसमे इन दोनों का उपयोग अलग अलग तरीके से किया जाता है। जब कोई शिपमेंट निर्यात किया जाता है तो कस्टम विभाग को इसकी पूरी जानकारी उसके पोर्टल पर सबमिट करनी पड़ती है।

जब कस्टम विभाग इसे अप्रूव कर के एक डॉक्यूमेंट जारी करता है। जिसे शिपिंग बिल कहते हैं।यही जब कोई शिपमेंट आयात किया जाता है तो इम्पोर्टर द्वारा इसकी पूरी जानकारी कस्टम विभाग को चेकलिस्ट के रूप में सबमिट की जाती है।

जिसे कस्टम विभाग अप्रूव कर के एक डॉक्यूमेंट जारी करता है जिसे बिल ऑफ़ एंट्री कहते हैं।
शिपिंग बिल एक्सपोर्ट करने के लिए उपयोग में लाया जाता है जब की बिल ऑफ़ एंट्री इम्पोर्ट शिपपमेंट में आवश्यक होता है।

Question 6. मुझे शिपिंग बिल कैसे मिलेगा?

 Answer 6. आयात होने वाला शिपमेंट जब अपने उदगम पोर्ट या पोर्ट ऑफ़ डिस्चार्ज से जहाज में लोड हो के निकल जाता है। जिसके पश्चात एक्सपोर्टर द्वारा इम्पोर्टर को परइ इंटिमेशन डॉक्यूमेंट भेजा जाता है। जिसे प्राप्त कर के इम्पोर्टर द्वारा एक चेकलिस्ट तैयार कर के सब जानकारी ICEGATE पोर्टल पर दी गई मार्गदर्शिका के अनुशार चरण दर चरण भर दी जाती है। जिसके पश्चात कस्टम विभाग इसे अप्रूव कर देता है। और तब आप इस डॉक्यूमेंट को डाउनलोड कर सकते हैं। इसी को ही बिल ऑफ़ एंट्री कहते हैं।

 

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